Thursday, 6 April 2017


अरे ओ संभाजी... जी सरकार. कितने आदमी थे ? दो ही सरकार. फिर भी तुम पुरा छे हजार का टैंकर खाली कर आये ? जी स..र..का..र.. ह्या..ह्या...ह्या....हमें तुमपे नाझ है संभा...मांग ले जो चाहे वो... सर..कार..बस..कुछ नही सरकार..बस आधे दिन की छुट्टी चाहिये सरका..र.. बस्स ! आधाही दिन ? जी सर..का..र..घर का पानीही तो भरना है..घरवाली की भौत किरकिरी रैती सरकार..बोलती दिनभर पुरे गांव को गिला करते घुमते हो और अपनेही घर में अकाल..बोल्दो तुमरे बिना बिवी,बच्चेवाले सरकार कू... खामोश !...फोन बज रहा है... जी सर..हां सर..ओके सर..बस्स अभ्भी भेजता हूं सर..अरे रहने दो सर..पैसे थोडे ही ना भागते..पानी जैसे !ह्या..ह्या...ह्या.... संभाजी...चल ये ले एड्रेस और जल्दी कलेक्टरसाब के यहां पानी डालके आ... सर...आधा..दिन..घरवा... अरे ओ औरंगजेब !च्यामारी..तेरी तो... ठिशक्यॉंव..ठिशक्यॉंव..ठिशक्यॉंव...

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